मधुमेह यह एक लाइफ स्टाइल डिस्ऑर्डर है. और जब भी खानपान या व्यायाम मे फरक पड़ेगा तब शुगर लेवल पर इसका इफेक्ट पड़ेगा.
इसी वज़ह से बारबार लगातार हर महीने शुगर टेस्ट करना जरूरी है.
हम खाना गिनके नहीं खाते, नाहीं हर एक रोटी एक साईज की होती है नाही एक रोटी मे कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सेम होती है तो फिर शुगर लेवल कैसे रोज एक जैसा ही दिखे? इसके अलावा भी हर एक शुगर चेक करने की मशीन एक समान रीडिंग नहीं दिखाती, उसमे भी तो बदल है एरर है.
इसी वज़ह से एक जैसा शुगर लेवल रखना हमेशा ये बहुत डिफिकल्ट हो जाता है.
और बार बार टेस्ट करना अनिवार्य है.

अब आते हैं कि मधुमेह मरीजों ने कौन-से टेस्ट करने चाहिए?
- 1. खाली पेट शुगर रीडिंग – यह बहुत ही जरूरी टेस्ट है. यह टेस्ट अपणे लिवर के शुगर बनाने के मात्रा पर निर्भर है और अगर दिन की शुरुआत ही 200 शुगर लेवल से हो तो पूरा दिन खाने के बाद तो शुगर और ही बढ़ेगी. तो इसे कन्ट्रोल मे रखना बेहत जरूरी है. शुगर का अच्छा कंट्रोल फास्टींग शुगर लेवल के अच्छे नियंत्रण से ही शुरु होता है. मधुमेह के मरीजों ने फास्टींग शुगर लेवल 100-110 mg/dl के नीचे रखना जरूरी है.
- 2. खाना खाने के बाद दो घंटे वालीं रीडिंग – यह टेस्ट एक प्रकार से अग्नाशय (pancreas) का काम करना दर्शाता है. काफी लोगों मे खाना खाने के बाद शुगर बढ़ना जल्दी शुरू होता है. खाना दो हिस्सों में बांट लेने से या सरल कार्बोहाइड्रेट (जैसे चावल) अवॉइड करने से काफी हद तक खाना खाने के बाद बढ़ने वालीं शुगर नियंत्रण मे ला सकते हैं. खाना खाने के दो घंटे बाद वालीं रीडिंग आपने 140 mg/dl से नीचे रखना जरूरी है.
- 3. एच बी ए वन सी (HbA1c) – यह पिछ्ले तीन माह का एवरेज शुगर रिपोर्ट होता है और काफी भरोसेमंद है. बाकी शुगर रिपोर्ट उस दिन के खाने की मात्रा से कम ज्यादा हो सकते हैं पर HbA1c रिपोर्ट पर इसका असर नहीं होता. यह रिपोर्ट अमेरिकन डायबिटीज असोसिएशन के द्वारा निर्धारित किए प्रमाण अनुसार सात पर्सेन्ट (<7%) से कम रखना जरूरी है ताकि मधुमेह से होने वाली समस्याए से बचना आसान हो. यह टेस्ट हर 3 से 6 महीने में करना चाहिए.
- 4. सिरम क्रियाटीनीन (serum creatinine) – यह टेस्ट अपने गुड़ दे (किडनी) का काम करना दर्शाता है. आम तौर पर इंसान के पास दो गुड़ दे होते हैं और एक निष्क्रिय हो जाए तो दुसरा काम करता है पर जब करीब डेढ़ किडनी पे प्रेशर आए तभी क्रियाटीनीन बढ़ना चालू होता है. लंबे समय से जिनको मधुमेह है उनमे क्रॉनिक किडनी डिसीस होने के चांस बढ़ जाते हैं. यह रिपोर्ट मधुमेह के मरीजों ने छह माह से एक साल में चेक करना चाहिए.
- 5. लिपिड प्रोफाइल (lipid profile) – यह टेस्ट अपने खून मे होने वाली चरबी की मात्रा दर्शाता है. कोलेस्ट्राल बढ़ने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक अटैक आने के चांस बढ़ जाते हैं. मधुमेह मे शुगर के कारण पहले ही खून गाढ़ा बन जाता है उसमे अगर कोलेस्ट्राल की मात्रा बढ़ जाती है तो छोटी खून की नालियां ब्लॉक हो जाने के चांस काफी बढ़ जाते हैं. इसलिए कोलेस्ट्राल कन्ट्रोल मे रखना जरूरी है. उसमे भी जो एल डी एल (LDL) कोलेस्टेरॉल होता है वह ज्यादा बुरा है और मधुमेह के मरीजों ने उसे नियंत्रण में रखने की कोशिश करनी चाहिए. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट मधुमेह के मरीजों ने छह महीने में एक बार जरूर करना चाहिए.
इन टेस्ट के अलावा भी ईसीजी, एक्स रे, सोनोग्राफी, ईत्यादी टेस्ट भी जरूरी होते हैं जो आप आपके डॉक्टर के सलाह अनुसार कर सकते हैं.
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