अभी देखा जाए तो हम भारतीय लोगों के खाने मे कार्बोहाइड्रेट (carbohydrates) की मात्रा जादा रहती है मतलब लगभग 75% से 80% कार्बोहाइड्रेट हमारे खाने मे रहता है। और सभी कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाते हैं।
और जैसा की आपको पता होगा की जब हम खाना खाते है तो हमारी शुगर लेवल बढ़ जाती है । और ये जो शुगर का उतार चढ़ाव है उसीको हम ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी कहते है।
अब आइए जानते है की ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी को जानना हमे क्यू इतना महत्वपूर्ण है ?
ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी आगे चल के डायबिटीज की कठिनाइयोंकों दर्शाता है। और अगर किसी पेशंट मे ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी का variations (याने की शुगर की मात्रा का कम जादा होना ) काफी जादा हो तो tissues (कोशिका ) जल्दी खराब होगी । वैसे तो मधुमेह के मरीज अपनी सेहत का काफी खयाल रखने के लिए डॉक्टर से रेगुलर चेकअप करवाते है ही ।
अबतक जो भी विशेषज्ञ डॉक्टर है वो डायबिटीज के मरीज चेक करते समय इन 3 चिकित्साए रेगुलर करते है ।
1. फास्टिंग शुगर

- रातभर खाना न खाने के बाद जो ब्लड शुगर की लेवल है उसे मापना याने की फास्टिंग
- 99 मिलीग्राम / डीएल या उससे कम अगर ब्लड शुगर का स्तर है तो ये नॉर्मल है, लेकिन 100 से 125 मिलीग्राम / डीएल दर्शाता है कि आपको प्रीडायबिटीज है, और 126 मिलीग्राम / डीएल या इससे अधिक है तो आपको मधुमेह (diabetes ) है।
2. Postprandial

- Prandial ( प्रैन्डियल ) भोजन से संबंधित है। पोस्टप्रैन्डियल का मतलब है खाना खाने के बाद, जबकि प्रीप्रैन्डियल का मतलब खाना खाने से पहले होता है। तो हमे P.P. याने की पोस्टप्रैन्डियल करने बाद पता चलता है की शुगर का लेवल कैसा है.
3. HbA1c

- HbA1c पिछले दो से तीन महीनों के लिए आपका औसत रक्त शर्करा (शर्करा) का स्तर क्या है, ये पता करता है । यदि आपको मधुमेह है, तो एक आदर्श HbA1c स्तर 48 mmol/mol (6.5%) या उससे कम है।
लेकिन उसमे और दो चीजों को बढ़ाया गया है।
4. ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी
5. जीवन स्तर (quality of life )
क्या हो अगर ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी जादा रहेगी तो ?
ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी अगर ज्यादा रहेगी तो अल्पशर्करारक्तता ( hypoglycemia ) याने की लो शुगर होने कि संभावना जादा होती है।
एंडोथाइल (Endothelial) डॅमेज होने कि संभावनायें बढ़ जाती है ।
हार्ट से संबंधित कुछ समस्याए या उलझने बढ़ सकती है ।
कैसे करे ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी को कंट्रोल ?
खाना खाने के बाद अगर आपकी शुगर कि मात्रा थोड़ीसी ही बढ़ती है तो आपके टिशू कम डैमेज होंगे, लेकिन इनका वेरिएशन कभी 70 कभी 150 ऐसा है तो आपको ये कंट्रोल मे लाना बेहद जरूरी है।
नीचे कुछ सूची आपके लिए बनाई है जिसे पढ़ के आप समझ सकते है ।
- DIET (आहार नियंत्रण)

डाइट (diet) फॉलो करना जैसे कि कार्बोहाइड्रेट कि मात्रा को कम रखना और प्रोटीनजन्य पदार्थो का उपयोग जादा रखना। उससे ग्लूकोस की मात्रा कम कार्बोहाइड्रेट की वजह से नहीं बढ़ेगी।
खाना खाने के बाद बढ़ने वाली शुगर को ऐसे करे कंट्रोल
2. EXERCISE (एक्सरसाइज )

आपको जादा तनावपूर्ण एक्सरसाइज करने की जरूरत नहीं है ।
आप सायकलिंग कर सकते है या फिर हो सके तो पैदल चलना भी एक एक्सरसाइज ही है । इसके अलावा आप स्विमिंग भी कर सकते है । ऐरोबिक नृत्य और योगा भी आपको इसमे सहायता करेगा ।
- वेट लॉस
अगर आप एक अच्छा डाइट फॉलो करेंगे तो जरूर आपका वेट लॉस होगा । सुबह उठकर अगर आप गुनगुना पानी पीते है तो उसमे शरीर डिटोक्स होता है इससे मेटाबोलिस्म भी बढ़ता है और वेट लॉस भी होगा ।
सुबह और एक कम कर सकते है जैसे की 30 से 40 मिनट पैदल चलना, ये मोटापा कम करने के साथ साथ आपका शारीरिक स्वास्थ्य भी सुधारने मे सहायता करेगा।
- तनाव का स्तर कम रखना ( low stress level)
अगर आप कम तनाव रखेंगे तो भी ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी कम रहेगी इसके लिए आप स्वसन क्रिया को नियंत्रित करना जैसे की एक गहरी सांस ले और धीमा करके छोड़े । इसके अलावा रेलेक्सेशन प्रतिक्रीया का अभ्यास कर सकते है । और संतुलन से काम करना एक अच्छा माध्यम है तनाव कम करनेका। क्योंकि जितना टेंशन कम रहेगा उतनी शुगर भी कम रहेगी
कैसे करे ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी को चेक ?
वैसे तो हम अलग अलग तरिकोंका उपयोग करके ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी चेक कर सकते है । जैसे की SMBG, CGMS FGM. तो इनके बारे में अधिक जानते है।
- SMBG

सेल्फ मोनिट्रिंग ऑफ ब्लड ग्लूकोस याने की SMBG (एसएमबीजी) मधुमेह मेलिटस के लिए आधुनिक चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण घटक है। ग्लाइसेमिक नियंत्रण के एक विशिष्ट स्तर को प्राप्त करने और हाइपोग्लाइसीमिया को रोकने के लिए मधुमेह वाले लोगों और उनके स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के लिए एसएमबीजी की सिफारिश की गई है।
ये मोनिट्रिंग आप दिन मे 7 बार करनी है।
- सुबह उठते ही खाली पेट ।
- नाश्ते से पहले ।
- नाश्ते के 2 घंटे बाद।
- डिनर से पहले ।
- डिनर के 2 घंटे बाद।
- लंच से पहले
- लंच के 2 घंटे बाद।
सीजीएमएस (CGMS)

कंटीनुएस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम एक एफडीए द्वारा अनुमोदित डिवाइस है। इस डिवाइस में एक सेंसर होता है जो पेट के आसपास या हाथ पर लगाया जाता है। यह सेंसर शरीर के पेय पदार्थ (तरल पदार्थ) में शर्करा के स्तर की पहचान करता है और इसका रिपोर्ट वायरलेस से भेजता रहता है। हर 5 से 15 मिनट तक इसकी रीडिंग्स नियमित अंतराल पर मॉनिटर कर सकते हैं.
एफ़जीएम
एफ़जीएम का मतलब है फ्लैश ग्लूकोज मॉनिटरिंग (FGM) डायबिटीज के रोगियों के लिए एक फैक्ट्री-कैलिब्रेटेड, ब्लड ग्लूकोज मापने वाला सेंसर सिस्टम है। एक सेंसर का उपयोग करता है जो ऊपरी बांह के पीछे रखा जाता है और उपयोगकर्ता द्वारा बाहरी रूप से पहना जाता है, जिससे मोबाइल ऐप का उपयोग करके ग्लूकोज की जानकारी की निगरानी की जा सकती है।
अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।
कुछ दवा
वैसे तो मेरी सलाह यही है की अगर आपमे ग्लायसेमीक वेरीएबीलीटी जादा मात्रा मे हो तो आप नजदीकी डायबिटीज विशेषज्ञ से मिलकर उससे सलाह ले। या फिर alpha glucosidase inhibitors Dpp 4 inhibitors का उपयोग डॉक्टर की सहायता से कर सकते है ।
आशा है की आपको यह लेख पढ़कर काफी कुछ समझ मे आया होगा, अगर आपको कुछ शंकाए हो तो अवश्य आप मुझे पूछ सकते है।
धन्यवाद
